जिंदगी में कुछ पाने के लिए पूरी ईमानदारी से कोशिश की जाए तो मंजिल मिल ही जाती है ?

जिंदगी में कुछ पाने के लिए पूरी ईमानदारी से कोशिश की जाए तो मंजिल मिल ही जाती है ?

IAS Interview
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नमस्कार दोस्तों आप सभी का स्वागत है

फिर से हमारे एक नए पोस्ट में तो दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसे शख्स की जो आर्थिक तंगी के कारण पिता के साथ दुकान पर काम करके पढ़ाई की और बन गए  आईएस अधिकारी,


दोस्तों जैसे कि आप लोग जानते ही होंगे कि किसी ने सच ही कहा है अगर जिंदगी में कुछ पाने के लिए पूरी ईमानदारी से कोशिश की जाए तो मंजिल मिल ही जाती है।

वैसे तो कहा जाए तो सफलता के लिए सिर्फ जरूरी है जोश और लगन, व्यक्ति अपनी मेहनत और जोश के दम पर बड़ा से बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है और वही आजकल अक्सर देखा जा रहा है कि Competitive exam की तैयारी करने वाले स्टूडेंट अक्सर एक या दो बार असफल होने के बाद नर्वस हो जाते हैं,

वह अपना संतुलन खो बैठते हैं उन्हें यह लगने लगता है कि अगर वह सफल न हुए तो जिंदगी में क्या कर सकेंगे उन्हें आगे का रास्ता नहीं सूझता है,तो आज हम बताने जा रहे हैं  आपको 2018 बैच के आईएएस अधिकारी शुभम गुप्ता की कहानी तो कहानी के अंत तक जरूर बने र You must remain the story of Shubham Gupta, IAS officer of 2018 batch till the end of the story हें,

 #ias_success_story  तो ऐसे की प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी शुभम ने वर्ष 2015 में प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी शुरू की और उन्होंने पहले अखबार पढ़ना शुरू किया। इससे  उन्हें यह जानने में मदद मिली कि पर्यावरण, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मामलों या भारतीय अर्थव्यवस्था जैसे मामलों में आसपास क्या हो रहा है।What is happening around in matters like national and international affairs or the Indian economy.

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फिर उन्होंने विषय विशेष की तैयारी शुरू कर दी। एक विषय चुना और फिर उस विषय से संबंधित एनसीईआरटी पुस्तक को पढ़ा।

उन्होंने पाठ्यक्रमों को विभाजित(Courses Divided () किया और एक-एक करके विषयों Topics) को पूरा किया।

वहीं, अपनी ताकत और कमजोरी का आकलन करने के लिए मॉक टेस्ट का भी अभ्यास किया।At the same time, he also practiced mock test to assess his strength and weakness.

मुख्य परीक्षा के लिए ऐसे बनाई रणनीति शुभम बताते हैं कि मुख्य परीक्षा के लिए आपको परीक्षा में खुद को अच्छी तरह से व्यक्त करने के लिए विषयों का गहन ज्ञान प्राप्त करना होगा Such a strategy for the main exam, Shubham explains that for the main exam, you have to get deep knowledge of the subjects to express yourself well in the exam.। मैंने अपने प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी की शुरुआत से ही अपने वैकल्पिक विषय के लिए नोट्स बनाना शुरू कर दिया था।

मैंने मुख्य रूप से उत्तर लेखन अभ्यास पर ध्यान केंद्रित किया।मैं जीएस 1, 2 3, 4 पेपर, वैकल्पिक 1 और 2 विषय पेपर और निबंध लेखन पेपर के कम से कम 2 मॉक टेस्ट देता था। आपका ध्यान पेपर को पूरा करने के लिए होना चाहिए, भले ही आप वर्णनात्मक पेपर में उत्तर नहीं जानते हों। इंटरव्यू राउंड की महत्वपूर्ण बातें शुभम के अनुसार इंटरव्यू राउंड की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपने आत्मविश्वास और धैर्य के स्तर को बनाए रखें।

इंटरव्यू से पहले अपने स्ट्रेस लेवल को मैनेज करने की कोशिश करें। शुभम बताते हैं कि मैं खुद को शांत और तनाव मुक्त बनाने के लिए चॉकलेट खाता था। फिर जब आप इंटरव्यू बोर्ड रूम में प्रवेश करते हैं तो 2 मिनट की शुरुआत में खुद को शांत करने की कोशिश करें।

यदि आप इंटरव्यूवर का अच्छी तरह से अभिवादन करने में सक्षम हैं और साक्षात्कार के पहले कुछ मिनटों में अच्छी तरह से अपनी सीट लेते हैं तो यह आपका आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करेगा और आपको ज्ञान आधारित प्रश्नों के उत्तर देने में सहायता करेगा।

इंटरव्यू के दौरान, इंटरव्यूवर का ध्यान उन विषयों पर लाने का प्रयास करें जिनसे आप अवगत हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि आप इंटरव्यू का नेतृत्व कर सकते हैं।लेकिन, जब भी आपको इंटरव्यू का नेतृत्व करने का मौका मिले, तो इसे ले लें और इसका अधिकतम लाभ उठाएं। तो बता दे दोस्तों की शुभम गुप्ता मूलत: राजस्थान के जयपुर के रहने वाले हैं

शुभम की शुरुआती पढ़ाई जयपुर से ही हुई वह एक बेहद गरीब परिवार से हैं शुभम बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज थे और आर्थिक तंगी से जूझ रहा शुभम का परिवार जयपुर से महाराष्ट्र चला गया और बता दें कि शुभम के पिता महाराष्ट्र के छोटे से गांव दहानू रोड पर रहने लगे और वही एक छोटी सी दुकान खोली और बता दें कि जैसे तैसे शुभम की पढ़ाई चलती रही उनके पिता शुरू से ही उन्हें हौसला देते रहे कि जिंदगी में अगर सफल होना है तो कभी हिम्मत नहीं  हारनी चाहिए,

वही काम शुभम ने अब पिता का व्यवसाय में भी मदद करना शुरू कर दिया हुआ स्कूल से आने के बाद अपनी किताबें लेकर पिता की दुकान पर आ जाते थे और वही दुकान पर काम करने के साथ खाली समय में पढ़ाई भी करते थे दोस्तों बता दें कि पढ़ाई पूरी होने के बाद शुभम यूपीएससी की तैयारी में लग गए उन्होंने साल 2015 में पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी लेकिन प्री एग्जाम में फेल हो गए उन्होंने तैयारी जारी रखी और अगले साल फिर से एग्जाम दिया इस बार शुभम ने यूपीएससी क्लियर तो कर लिया लेकिन उनके रैंक बहुत ही कम थी इसलिए उन्होंने ज्वाइन नहीं किया |

जिंदगी में कुछ पाने के लिए पूरी ईमानदारी से कोशिश की जाए तो मंजिल मिल ही जाती है ?
ias_success_story   दोस्तों बता दें की शुभम को खुद पर पूरा भरोसा था इसलिए उन्होंने तीसरी बार साल 2017 में फिर से एग्जाम दिया लेकिन यह साल भी शुभम के लिए ठीक नहीं रहा वह इस बार प्री में ही फेल हो गए, और बता दें कि शुभम ने हौसला अभी भी बिल्कुल नहीं खोया था और चौथी बार प्रयास किया साल 2018 में शुभम ने चौथी बार पूरी क्षमता से तैयारी की इस बार शुभम ने वह कर दिखाया जिसकी किसी की भी उम्मीद नहीं थी,

बता दें दोस्तों कि शुभम ने ओवर ऑल इंडिया में छठवीं रैंक हासिल की और बता दें कि शुभम अपनी इस सफलता का श्रेय अपने पिता को देते हैं उनका कहना है कि मेरे पिता ने इतने कष्ट झेले आर्थिक अभावों के बाद भी मेरा हौसला बढ़ाया और मुझे पढ़ाया आज उन्हीं की देन है कि मैंने अपनी मंजिल हासिल की है।

तो दोस्तों आप बताएं कि आपको यह हमारी पोस्ट कैसी लगी अगर पोस्ट अच्छी लगी तो आप अपने दोस्तों के साथ फेसबुक व्हाट्सएप ग्रुप में भी शेयर जरूर करें मिलते हैं एक और नई ऐसे ही success stories के साथ तब तक के लिए, धन्यवाद

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